मैथिली भाषा आ साहित्य मे उत्कृष्ट योगदान लेल "प्रबोध साहित्य सम्मान" सँ विभूषित मिथिला क साहित्यकार
"प्रबोध साहित्य सम्मान" मैथिली भाषा आ साहित्य मे उत्कृष्ट योगदान लेल मिथिला क सर्वोच्च सम्मान अछि।
सं २००४ सँ कलकत्ता क प्रबोध नारायण सिंह (१९२४-२००५) क स्मृति मे स्थापित "प्रबोध साहित्य सम्मान" मैथिली भाषा आ साहित्य मे उत्कृष्ट योगदान लेल देल जाय छय। "प्रबोध साहित्य सम्मन" क स्थापना मैथिली भाषा आ साहित्य क उन्नति लेल समर्पित संस्था स्वस्ति फाउंडेशन द्वारा कयल गेल छल जाहिमे एक लाख टका सह स्मारक देल जाय छय।
स्वर्गीय प्रबोध नारायण सिंह कलकत्ता सँ सं १९५० सँ मैथिली भाषा आंदोलन से जुड़ल रहथिन। एहि क्रमे मैथिली मे व्यापक साहित्य क अभाव क आरोप के खण्डन करय लय, अहाँ कलकत्ता सँ "मिथिला दर्शन" नामक मासिक साहित्यिक पत्रिका क स्थापना कयने रहथिन। "मिथिला दर्शन" में कथा-कविता सह निबंध, आलोचना, नाटक, मिथिला क साहित्यिक धरोहर पर लेख, समस्त मिथिला क भाषा संबंधी आंदोलन क समाचार इत्यादि छपय रहय। १९५० क दशक पूर्वार्द्ध में स्थापित "मिथिला दर्शन" पुरान लेखक-कवि सह नवलेखन कय प्रोत्साहन देने रहय। संगहि मिथिला दर्शन मैथिली मे पुस्तक आ आधुनिक विधा - नाटक, अनुवाद, इत्यादि - क कमी कय पूरा करय लय प्रबोध बाबू मूल लेखन आ अनुवाद, अन्य लेखक सभ क प्रोत्साहन कय कतेको पुस्तक प्रकशित कयलखिन।
प्रबोध बाबू क कलकत्ता क घर मिथिला क बाहर मैथिली सेवी साहित्यकार, नाटककार आ जनआंदोलनकारी सभ क गढ़ रहय। समय भेटला पर प्रबोध बाबू मिथिला-कलकत्ता छोड़ि कय भारत वर्ष क अन्य नगरी मे नियमित मैथिली भाषा क संविधान मे मान्यता दिएबाक प्रयास मे मैथिली-प्रेमी आ राजनीतिक लोकनि सभ मे मैथिली क मान्यता क जागरूकता काज मे भरि जीवन लागल रहथिन।
प्रबोध बाबू अथक प्रयास सँ हुनकर जीवनकाल मे २००३ मे मैथिली कय भारतीय संविधान क आठम सूची मे राष्ट्रीय भाषा क रूप मे मान्यता भेटल छल।
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२०१६ क "प्रबोध साहित्य सम्मान" क समर्पण समारोह क छवि
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| (बामा सँ: विद्यानन्द झा, उदय नारायण सिंह 'नचिकेता', अभय नारायण सिंह, रविन्द्र नाथ ठाकुर ("प्रबोध साहित्य सम्मान-२०१६" से विभूषित मैथिली कवि) |
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