मिथिला मे देखाइ ते पड़ै, परन्तु न फरय न फुलाय . . .
मिथिला क बुझौअलि मे आइ एहन बुझौअलि देल गेल छै जे मिथिला मे देखाइ ते पड़ै छै, परन्तु एतय न फरय न फुलाय छै! इ बुझौअलि सभ' कय बुझू ते जानि . . . | १ | फरय न फुलाय ढाकी-ढाकी बहराय। | २ | फरय न फूलाय ढाकी-ढाकी बिकाय | ३ | फरय न फूलाय उपरे उड़ल जाय | ४ | फरय न फुलाय सुरंग-सुरंग बढ़ल जाय | ५ | फरय न फुलाय कान सँ बहराय | ६ | फरय न फुलाय बढ़ले जाय एतय देल बुझौअलि मे से पहिल चारि हमर स्वर्गीय बाबूजी प्रेम शंकर सिंह (ग्राम - जोगिआरा, जिला - दरभंगा) क मिथिला क बुझौअलि संकलन आ शेष दू टा पारम्परिक 'फरय न फुलाय' जकाँ नवनिर्मित बुझौअलि अछि। अहुँ 'फरय न फुलाय' बुझौअलि बनाय कय भेजि सकैत छी। - प्रणव कुमार सिंह, नॉएडा *** अपन उत्तर जाँचै लेल नीचाँ स्क्रोल करू . . . > > > > > > > > > > > > > > > > > > > > > > > > > | १ | छाउर | २ | नोन | ३ | धुइयाँ | ४ | बाँस | ५ | गुज्जी ...